गुरुग्राम में सर्दी ने 60 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो जमाव बिंदु के करीब है। इससे खुले स्थानों और खेतों में पाला जम गया, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ और फसलों को नुकसान की आशंका है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए शीतलहर का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
HIGHLIGHTS
1.गुरुग्राम में 60 साल का सबसे ठंडा दिन दर्ज हुआ।
2.न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस, फसलों को खतरा बढ़ा।
3.मौसम विभाग ने शीतलहर का ऑरेंज अलर्ट जारी किया।
गुरुग्राम। गुरुग्राम में सर्दी ने पिछले 60 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। पारा जमाव बिंदु के समीप पहुंच गया और ऑटोमैटिक वैदर स्टेशन पर न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु के बेहद करीब पहुंचने के कारण खुले स्थानों में खड़ी गाड़ियों के शीशों पर बर्फ की परत जम गई, जबकि खेतों में भी पाला जमा। कड़ाके की सर्दी के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ।
बता दें कि इससे पहले 5 दिसंबर 1966 को यहां न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भी कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, लेकिन तापमान नहीं इतना नीचे पहुंचा था। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 16 जनवरी 2023 को न्यूनत तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस, 17 जनवरी को 2.4 डिग्री सेल्सियस और 12 जनवरी 2024 को न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
ठंड के चलते सुबह के समय सड़कों पर आवाजाही कम रही और लोग अलाव व गर्म कपड़ों का सहारा लेते नजर आए।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी सर्द हवाओं और साफ आसमान के कारण तापमान में तेज गिरावट आई है। हालांकि दिन चढ़ने के साथ तेज धूप खिली, जिससे दोपहर में लोगों को कुछ राहत मिली ।
अधिकतम तापमान 18.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन सुबह और देर शाम ठिठुरन बनी रही। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक शीतलहर चलने की संभावना जताते हुए आरेंज अलर्ट जारी किया है।
खेतों में पाला, फसलों पर खतरा
कड़ाके की सर्दी का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्र में देखने को मिला। गुरुग्राम के आसपास के गांवों में खेतों में पाला जम गया, जिससे आलू सहित अन्य सब्जियों और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। कृषि मौसम विशेषज्ञ के अनुसार इतने कम तापमान पर पौधों की पत्तियों में मौजूद नमी जम जाती है, जिससे कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं और फसल की बढ़वार रुक सकती है। किसानों को सिंचाई, धुआं करने और फसलों को ढकने जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
इसलिए जमता है पाला
विशेषज्ञों के अनुसार, जब रात के समय आसमान साफ होता है और हवा की गति बहुत कम रहती है, तो धरती की ऊष्मा तेजी से बाहर निकल जाती है। इससे सतह का तापमान शून्य डिग्री या उससे नीचे पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में हवा में मौजूद नमी जमकर पाले का रूप ले लेती है। यही कारण है कि खुले खेतों, घास और वाहनों के शीशों पर बर्फ की परत दिखाई देती है।
पहाड़ों से आ रही सर्द हवा, मैदानों में ठिठुरन
मौसम विशेषज्ञोंं के अनुसार तापमान के जमाव बिंदु तक पहुंचने के पीछे पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद आई ठंडी और शुष्क हवाओं को मुख्य कारण माना जा रहा है। उत्तर भारत में पहाड़ों से आ रही सर्द हवाओं ने मैदानी इलाकों में ठंड बढ़ा दी।
सर्दी से करें बचाव
चिकित्सकों ने कड़ाके की ठंड में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। सुबह और रात के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, ऊनी कपड़े, टोपी और दस्ताने पहनें तथा बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें। ठंड के मौसम में पर्याप्त गर्म भोजन और तरल पदार्थ जैसे सूप आदि का सेवन करें।
कोहरे में वाहन चलाते समय बरतें सावधानी
ठंड के साथ कोहरे की समस्या भी बढ़ रही है। सुबह के समय दृश्यता कम होने से सड़क हादसों का खतरा रहता है। वाहन चालकों को फॉग लाइट का इस्तेमाल करने, धीमी गति से चलने और वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिन तक शीतलहर का असर बना रह सकता है, ऐसे में सतर्कता ही बचाव है।







