जमशेदपुर के फुटपाथ पर रहने वाला ‘कृष का गाना सुनेगा क्या’ फेम धूम (पिंटू) अचानक लापता हो गया है। इंटरनेट सेंसेशन बनने के बाद कई यूट्यूबर्स ने उससे कमाई की। अब उसकी गुमशुदगी पर बाल संरक्षण संस्थाओं ने चिंता जताई है। उपायुक्त और एसएसपी को शिकायत दर्ज कर आशंका व्यक्त की गई है कि उसे नशा मुक्ति या समाज सेवा के नाम पर आर्थिक लाभ के लिए रखा गया है। प्रशासन से जांच और सुरक्षा की मांग की गई है।
HIGHLIGHTS
1.’ का गाना’ फेम धूम जमशेदपुर से अचानक लापता।
2.बाल संरक्षण संस्थाओं ने गुमशुदगी पर गंभीर चिंता जताई।
3.नशा मुक्ति के नाम पर शोषण की आशंका, जांच की मांग।
जमशेदपुर। ‘कृष का गाना सुनेगा…’, इस एक पंक्ति ने जमशेदपुर के फुटपाथ पर जीवन बिताने वाले किशोर धूम (पिंटू) को देशभर में पहचान दिला दी। उसकी अनोखी आवाज और मासूम अंदाज ने इंटरनेट मीडिया पर ऐसा असर डाला कि कुछ ही दिनों में वह इंटरनेट सेंसेशन बन गया। लेकिन अब वही धूम अचानक गायब है।
उसके लापता होने की खबर से जमशेदपुर में ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बागबेड़ा क्षेत्र में रहने वाला धूम पिछले कई दिनों से दिखाई नहीं दे रहा है। जो बच्चा रोज सड़कों, चौक-चौराहों और फुटपाथ पर नजर आता था, उसका इस तरह अचानक गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
न तो उसके ठिकाने की कोई पुख्ता जानकारी है और न ही यह स्पष्ट है कि वह किसके साथ और किन परिस्थितियों में गया। धूम का वीडियो वायरल होने के बाद देश के अलग-अलग राज्यों से कई यूट्यूबर, कंटेंट क्रिएटर और डिजिटल चैनल जमशेदपुर पहुंचे।
किसी ने उसके साथ गीत रिकॉर्ड किया, किसी ने इंटरव्यू लिया तो किसी ने भावनात्मक कहानी गढ़कर वीडियो बनाए। इन वीडियो को लाखों-करोड़ों व्यूज मिले और कई लोगों ने इससे आर्थिक लाभ भी कमाया। विडंबना यह है कि जिस बच्चे की आवाज और पहचान से सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और कमाई हुई, वही बच्चा आज लापता है।
यह सवाल अब राष्ट्रीय स्तर पर उठने लगा है कि इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे बच्चों की सुरक्षा और जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
नशा मुक्ति के नाम पर संदेह, शिकायत दर्ज
मामले को गंभीर बताते हुए बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान और बाल संरक्षण से जुड़ी संस्था के अध्यक्ष सदन ठाकुर ने उपायुक्त (डीसी) कर्ण सत्यार्थी और वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पीयूष पांडे को लिखित शिकायत की है। इसमें आशंका जताई गई है कि कुछ लोग धूम को एक कमरे में रखकर उसके वीडियो बना रहे हैं और नशा मुक्ति केंद्र या समाज सेवा के नाम पर आर्थिक लाभ उठा रहे हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिन संस्थाओं या व्यक्तियों ने नशा मुक्ति के नाम पर काम करने का दावा किया, उनकी वैधानिक स्थिति की जांच होनी चाहिए। क्या वे पंजीकृत हैं, क्या उनके पास मेडिकल और प्रशासनिक अनुमति है, और क्या वास्तव में किसी बच्चे का पुनर्वास किया जा रहा है, इन सभी बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है।
शहर में उठ रहे गंभीर सवाल?
धूम की गुमशुदगी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वायरल होने के बाद किसी बच्चे को उसकी मर्जी के बिना कहीं रखा गया? क्या नशा मुक्ति और समाज सेवा के नाम पर फर्जीवाड़ा हो रहा है? क्या सोशल मीडिया से कमाई करने वालों की कोई जवाबदेही तय है? बाल अधिकार संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह केवल एक बच्चे की गुमशुदगी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे सिस्टम की विफलता का उदाहरण बन जाएगा।
जांच की मांग तेज, धूम की सलामती पर नजर
बागबेड़ा निवासी सोनू कुमार धूम का भाई होने का दावा करता है। उन्होंने कहा कि दस दिन पूर्व किसी ने रात में धूम को लेकर गया। इसके बाद उसे देखा नहीं गया है, जो चिंता का विषय है। ऐसे में प्रशासन से मांग है कि धूम की तत्काल तलाश की जाए, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो और यदि किसी ने नशा मुक्ति या समाज सेवा के नाम पर आर्थिक लाभ के लिए उसका इस्तेमाल किया है तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।







