जमशेदपुर के अपूर्व आनंद ने ऑस्ट्रेलिया में 226 किमी की आयरनमैन ट्रायथलान पूरी कर झारखंड के पहले व्यक्ति बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने तैराकी, साइकिलिंग और मैराथन की कठिन चुनौती पार की। इसी बीच, मुक्केबाज रोनित राज गुप्ता ने नोएडा में 9वीं एलीट नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर 15 साल बाद झारखंड को सीनियर नेशनल पदक दिलाया। दोनों ने खेल जगत में राज्य का नाम रोशन किया।
HIGHLIGHTS
1.अपूर्व आनंद ने ऑस्ट्रेलिया में 226 किमी आयरनमैन ट्रायथलान पूरी की
2.रोनित राज गुप्ता ने राष्ट्रीय बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीता
3.जमशेदपुर। जमशेदपुर, जिसे दुनिया फौलाद के शहर के रूप में जानती है, वहां के बेटों के इरादे भी लोहे जैसे मजबूत साबित हो रहे हैं।
खेल के मैदान से झारखंड के लिए दो ऐसी बड़ी खबरें आई हैं, जिन्होंने राज्य का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। जहां अपूर्व आनंद ने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर दुनिया की सबसे कठिन ‘आयरनमैन ट्रायथलान’ पूरी कर इतिहास रचा है, वहीं रोनित राज गुप्ता ने नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पंच के दम पर पदक जीतकर झारखंड का मान बढ़ाया है।
अपूर्व आनंद: बने झारखंड के पहले आयरनमैन
संकल्प और संयम की अनूठी मिसाल पेश करते हुए लौहनगरी के अपूर्व आनंद ने ‘आयरनमैन ट्रायथलान’ पूरी कर ली है। वे यह गौरव हासिल करने वाले झारखंड के पहले व्यक्ति बन गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के केर्न्स में आयोजित इस महामुकाबले में अपूर्व ने अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति का लोहा मनवाया।
अपूर्व ने एक ही दिन में 226 किलोमीटर की अविश्वसनीय दूरी तय की। इस कठिन चुनौती में उन्होंने खुले समुद्र में 3.8 किलोमीटर की तैराकी की, फिर 180 किलोमीटर साइकिल चलाई और अंत में 42.2 किलोमीटर की पूर्ण मैराथन दौड़ पूरी की।
टाटा स्टील के सेवानिवृत्त अधिकारी दिनकर आनंद के पुत्र अपूर्व बचपन से ही तैराक रहे हैं और फिलहाल टाटा डिजिटल में कार्यरत हैं। उनकी इस सफलता में उनकी पत्नी और बेटी का भी बड़ा सहयोग रहा।
रोनित राज: 15 साल बाद झारखंड की झोली में पदक
बॉक्सिंग रिंग से भी जमशेदपुर के लिए खुशखबरी आई है। नोएडा में आयोजित 9वीं एलीट मेंस नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रोनित राज गुप्ता ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। रोनित ने 47-50 किलोग्राम भार वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की।
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि सीनियर नेशनल बॉक्सिंग में झारखंड को पूरे 15 साल के लंबे अंतराल के बाद कोई पदक मिला है।
सोमवार को जब रोनित टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंचे, तो वहां का नजारा देखने लायक था। खेल प्रेमियों और परिजनों ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। झारखंड बॉक्सिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इसे राज्य में मुक्केबाजी के पुनरुद्धार का संकेत बताया है।
संघर्ष और सफलता की साझा कहानी
इन दोनों खिलाड़ियों की सफलता यह बताती है कि जमशेदपुर में अनुशासन और खेल की संस्कृति कितनी गहरी है। जहां अपूर्व ने अपनी इंजीनियरिंग और एमबीए की व्यस्तताओं के बावजूद फिटनेस के उच्चतम स्तर को छुआ।
वहीं रोनित ने रिंग में सालों की मेहनत को पदक में बदला। इन दोनों युवाओं की उड़ान छोटे शहरों के उन हजारों एथलीटों के लिए प्रेरणा है, जो अभावों के बावजूद आसमान छूने का सपना देखते हैं।







