भारतीय खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा में फूट पड़ गई है। भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने संगठन को कमजोर किया, जिससे शीर्ष नेताओं में असहमति बढ़ी।
HIGHLIGHTS
1.लश्कर-ए-तैयबा में भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पड़ी फूट।
2.संगठन के सदस्यों का पाकिस्तानी सेना, आईएसआई से भरोसा टूटा।
3.चीन-अमेरिका के हितों पर पाकिस्तान के फैसलों से नाराजगी।
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान से एक बड़ी खबर पता लगाई है। पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के अंदर फूट पड़ चुकी है, जिसके पीछे का कहीं-न-कहीं एक बड़ा कारण भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी है।
लश्कर-ए-तैयबा में पड़ी फूट
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा में समस्याएं शुरू हो गई हैं और कुछ शीर्ष नेता हाल के महीनों में संगठन के लिए गए कुछ फैसलों से सहमत नहीं हैं। अधिकारी ने आगे बताया कि ऑपरेशन सिंदूर वह निर्णायक मोड़ था जिसके दौरान इस संगठन ने अपने बुनियादी ढांचे का एक बड़ा हिस्सा खो दिया।
लश्कर-ए-तैयबा में ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही संगठन को वापस जोड़ना मुश्किल हो रहा है। संगठन से जुड़े कई लोगों ने आईएसआई और पाकिस्तानी सेना से भरोसा खो दिया है, क्योंकि उनका मानना है कि अब वे उनकी रक्षा नहीं कर पाएंगे।
चीन-अमेरिका भी तकरार की वजह
खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े लोगों को लगता है कि पाकिस्तान की सरकार चीन और अमेरिका की मांगों को जरूरत से ज्यादा पूरा कर रही है। चीन और अमेरिका दोनों की ही बलूचिस्तान के खनिजों पर नजर है।
तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) और बलूचिस्तान मुक्ति सेना (बीएलए) दोनों ही बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं।
पाकिस्तान की सेना इन संगठनों से निपटने में असमर्थ है, इसलिए उसने टीटीपी और बीएलए से लड़ने के लिए इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (आईएसकेपी) को शामिल करने और उसे लश्कर-ए-तैयबा के साथ जोड़ने का फैसला किया है।
पाकिस्तानी सेना के इस फैसले को लेकर लश्कर के नेतृत्व ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि क्या चीन और पश्चिमी देशों के हितों की रक्षा के लिए अपने ही लोगों से लड़ना जरूरी है।







