सीमा से बाहर खुदाई, 40 गहरे होल और मंदिर से 66 मीटर दूरी,खदान तत्काल बंद।।
ग्रामीणों वेद प्रकाश पाठक के खिलाफ टीम को लिखित आवेदन अधिकारियों को सौंपे।।
छतरपुर। जिले में अवैध खनन की आड़ में स्वीकृत खदान को मनमर्जी का अड्डा बनाए जाने का मामला सोमवार को उस समय खुलकर सामने आया जब डीजीएमएस की उच्चस्तरीय टीम ने वेद प्रकाश पाठक की खदान का औचक निरीक्षण किया। जैसे ही टीम खदान क्षेत्र में उतरी, जमीन पर बने गहरे होल, बिखरी ड्रिलिंग सामग्री और लगातार चलती मशीनों की आवाजें इस पूरे खेल की परतें खोलने लगीं।
डीजीएमएस के निदेशक करम देव राम, उप निदेशक टी. प्रवीण कुमार और माइनिंग सर्वेयर मुनेन्द्र सिंह ने निरीक्षण की शुरुआत से ही पाया कि खदान में नियमों की अनदेखी इतनी भयानक रूप से की गई है कि इसे तत्काल प्रभाव से बंद करना ही एकमात्र रास्ता था।
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ जब टीम ने जमीन पर करीब चालीस गहरे होल पाए, जिनकी गहराई तीस-तीस फुट से भी अधिक थी। इन होल्स को चार इंच की ड्रिलिंग मशीन से तैयार किया गया था। अधिकारी जब इन होल्स के पास पहुंचे तो उनके पहले ही सवाल ने खदान संचालकों की चुप्पी तोड़ दी इतनी गहरी ड्रिलिंग किसकी अनुमति से कराई गई? खदान संचालक का कोई भी प्रतिनिधि इस सवाल का जवाब नहीं दे पाया। टीम को समझने में देर नहीं लगी कि यहाँ खनन मंजूरी की आड़ में पूरी तरह नियमविहीन खुदाई की जा रही थी, जिसमें सुरक्षा, संरचना और पर्यावरण का कोई ध्यान नहीं रखा गया।
जाँच आगे बढ़ी तो खदान की सीमा रेखा और वास्तविक खुदाई में भारी अंतर पाया गया। खदान के लिए स्वीकृत क्षेत्र से काफी बाहर तक जेसीबी और भारी मशीनों के निशान दिखे। नक्शा-खसरा मिलान में यह साफ हो गया कि खदानी गतिविधियाँ अपनी सीमा छोड़कर उन क्षेत्रों में प्रवेश कर चुकी थीं जहाँ किसी भी प्रकार की खुदाई पूर्णतः निषिद्ध है। इससे भी बड़ा गंभीर तथ्य तब सामने आया जब टीम ने खदान की बाउंड्री के पास स्थित प्राचीन मंदिर की दूरी मापी—यह दूरी मात्र 66 मीटर थी। इतनी नजदीक खदान संचालन न केवल नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, बल्कि यह धार्मिक स्थल, आसपास के घरों और ग्रामीण संरचनाओं के लिए सीधा खतरा भी है। इस आधार पर टीम ने तुरंत निर्णय लेते हुए खनन कार्य बंद कराने के आदेश जारी किए।
निरीक्षण के बीच में ही खदान संचालक के भाई नन्हे पाठक मौके पर पहुंचे, लेकिन डीजीएमएस अधिकारियों की सख्त फटकार से बच नहीं पाए। अधिकारियों ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह खदान नियमों से नहीं, मनमर्जी से चल रही है और इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर अब एक इंच भी काम नहीं चलेगा। टीम की इस फटकार ने वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों को भी साफ संकेत दे दिया कि इस बार मामला गंभीरता से लिया गया है और गलती किसी भी स्तर पर हो, बख्शा नहीं जाएगा।
जैसे-जैसे निरीक्षण आगे बढ़ा, ग्रामीणों की भीड़ खदान क्षेत्र में इकट्ठा होने लगी। देखते ही देखते 100 से 150 ग्रामीण मौके पर पहुँच गए। ग्रामीणों की आँखों में गुस्सा और माथे पर चिंता साफ पढ़ी जा सकती थी। उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा और शिकायतें रखीं कि कैसे अवैध खनन से उनके घरों में दरारें पड़ रही हैं, खेतों की मिट्टी प्रभावित हो रही है, धूल और कंपन से बुजुर्गों और बच्चों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और सबसे अधिक जलस्तर नीचे गिरता जा रहा है। ग्रामीणों ने वेद प्रकाश पाठक के खिलाफ लिखित आवेदन भी अधिकारियों को सौंपे, जिनमें अवैध खुदाई, धमकाने की घटनाएँ और खदान से हो रहे नुकसान का विस्तृत उल्लेख था।
जाँच को और भी मजबूती तब मिली जब ग्रामीणों ने अपने मोबाइल में बनाए गए वीडियो डीजीएमएस टीम को सौंपे। इन वीडियो में अवैध ड्रिलिंग और सीमा से बाहर की गई खुदाई स्पष्ट रूप से दर्ज थी। अधिकारियों ने इन वीडियो को गंभीर साक्ष्य मानते हुए जाँच का अनिवार्य हिस्सा बनाने की घोषणा की। यह पहली बार था कि ग्रामीणों द्वारा जुटाए गए डिजिटल प्रमाण इतने सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्रवाई में शामिल हुए।
डीजीएमएस ने निरीक्षण समाप्त करते हुए जिला खनन कार्यालय को स्पष्ट निर्देश दिए कि खदान संचालक के खिलाफ अवैध, अनधिकृत और नियम विरुद्ध खनन का मामला दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही निरीक्षण रिपोर्ट भोपाल डीजीएमएस मुख्यालय भेजने का निर्णय लिया गया, जिससे इस मामले पर उच्च स्तर पर भी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। टीम का रुख इतना सख्त था कि मौके पर खड़े मजदूरों और कर्मचारियों को तुरंत काम रोककर स्थल छोड़ने के आदेश दे दिए गए।
डीजीएमएस की इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में खनन माफिया के बीच खलबली मच गई है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि पहली बार किसी खदान पर इतनी कड़ी और तथ्य आधारित कार्रवाई हुई है, जिसमें न सिर्फ नियमों का उल्लंघन पकड़ा गया बल्कि ग्रामीणों की शिकायतों और वीडियो साक्ष्यों को भी समान महत्व दिया गया। ग्रामीणों ने इस कदम को राहत और न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना है और उम्मीद जताई है कि अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए इस प्रकार की कड़ी कार्यवाही भविष्य में भी जारी रहेगी।






