स्वर्णकार समाज में हड़कंप: नकली संगठन ने चुराया पुराना नाम, 11 फरवरी के शपथ समारोह को लेकर भिड़े दो धड़े!
पूर्व राज्यसभा सांसद कैलाश सोनी का प्रोग्राम रद्द
आयोजन समिति के पदाधिकारी पर मुकदमे की तैयारी।
सिंगरौली के स्वर्णकार समाज में एक नकली संगठन के गठन को लेकर तनाव गहरा गया है। संजय सोनी द्वारा पंजीकृत किए गए ‘सिंगरौली सर्राफा मंडल, सिंगरौली’ नामक संगठन को लेकर समाज के विभिन्न सदस्यों ने ‘नाम चोरी’और ‘समाज को बांटने की साजिश’ का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध शुरू कर दिया है।

शहर के पुराने और मान्यता प्राप्त स्वर्णकार संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि सर्राफा व्यापार मंडल, सिंगरौली’ नाम दशकों पुराना है और समाज की पहचान है। उनका आरोप है कि संजय सोनी ने इसी नाम के आगे सिंगरौली शब्द जोड़ लिया है और उसी नाम से कार्ड में दूसरी संस्था जिसका पंजीकरण सिंगरौली स्वर्णकार समाज संघ से है गलत तरीके से शब्दों का हेर फेर कर केंद्रीय स्वर्णका संगठन (अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ, 3545) से जुड़ाव का दावा कर रहे हैं। इससे सामाजिक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
11 फरवरी के शपथ समारोह को लेकर भड़का विवाद
मामला तब और गरमाया जब संजय सोनी की ओर से 11 फरवरी को एक बड़े शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। पुराने संगठन ने इसे ‘सामाजिक विभाजन का षड्यंत्र’ बताते हुए राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के नेताओं को चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई भी बाहरी नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए, तो उनका काला झंडा दिखाकर विरोध किया जाएगा।
प्रशासन में शिकायत दर्ज करने की तैयारी शुरू
विरोधी पक्ष ने इस पूरे मामले को लेकर थाना और कलेक्ट्रेट में शिकायत दर्ज करने की कार्यवाही शुरू हो गई है। उनका आग्रह है कि एक ही नाम में थोड़ी सी हर फेर कर दो संगठनों के पंजीकरण से उत्पन्न भ्रम की स्थिति को दूर किया जाए और नकली या भ्रमपूर्ण संगठन के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए।
समाज के सामने सवाल: असली कौन?
आज पूरा स्वर्णकार समाज एक बड़े सवाल से जूझ रहा है – “असली संगठन कौन सा है?”कई परिवार आपस में बंटते नजर आ रहे हैं। पुराने संगठन के लोगों का कहना है कि यह सामाजिक एकता को तोड़ने की सोची-समझी रणनीति है, जबकि नए गठन के समर्थक इसे युवाओं की नई पहल बता रहे हैं।
कल का दिन रखेगा सबका इम्तिहान
सभी की नजर अब कल होने वाले उस विवादित शपथ समारोह पर टिकी है। प्रशासन ने संवेदनशीलता को देखते हुए कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए हैं। यह दिन तय करेगा कि सिंगरौली का स्वर्णकार समाज एकजुट रहता है या फिर दो विरोधी धड़ों में बंट जाता है।
निष्कर्ष:
यह मामला अब सिर्फ संगठन के नाम का झगड़ा नहीं रहा, बल्कि सामाजिक विश्वास और पहचान का संकट बन गया है। समाज के लोग चाहते हैं कि प्रशासन त्वरित हस्तक्षेप करे और किसी भी तरह के सामाजिक विभाजन की साजिश को रोके।






